तत्पश्चात् शत्रु सेना का संहार करने वाले महाबली श्रीकृष्ण शिनिवंशी वीर योद्धा सात्यकि को साथ लेकर आनर्तपुरिया द्वारका की ओर चले, उसी प्रकार जैसे शत्रु समुदाय का संहार करके महाबली इन्द्र स्वर्ग की ओर जा रहे थे।
Thereafter, taking along with Satyaki the brave warrior of Shini, the mighty Sri Krishna who slayed the enemy forces, proceeded towards Anartapuriya, Dwarka, in the same manner as the mighty Indra was going to heaven after killing his enemy community.
इति श्रीमहाभारते आश्वमेधिके पर्वणि अनुगीतापर्वणि कृष्णप्रयाणे द्विपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्वमेधिकपर्वके अन्तर्गत अनुगीतापर्वमें श्रीकृष्णका द्वारकाको प्रस्थानविषयक बावनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५२॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १/२ श्लोक मिलाकर कुल ५८ १/२ श्लोक हैं)