निवर्तयित्वा कुरुराष्ट्रवर्धनां-
स्तत: स सर्वान् विदुरं च वीर्यवान्।
जनार्दनो दारुकमाह सत्वर:
प्रचोदयाश्वानिति सात्यकिं तथा॥ ५७॥
अनुवाद
तत्पश्चात् पराक्रमी श्रीकृष्ण ने कौरव राज्य की वृद्धि करने वाले उन समस्त पाण्डवों और विदुरजी को लौटा दिया और दारुक तथा सत्य से कहा - ‘अब घोड़ों को बलपूर्वक हांको’ ॥57॥
Thereafter, the mighty Shri Krishna returned all those Pandavas and Vidurji who had increased the Kaurava kingdom and said to Daruka and Satya - 'Now drive the horses with force'. 57॥