श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 52: श्रीकृष्णका अर्जुनके साथ हस्तिनापुर जाना और वहाँ सबसे मिलकर युधिष्ठिरकी आज्ञा ले सुभद्राके साथ द्वारकाको प्रस्थान करना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  14.52.40 
युधिष्ठिर उवाच
विवक्षू हि युवां मन्ये वीरौ यदुकुरूद्वहौ।
ब्रूतं कर्तास्मि सर्वं वां नचिरान्मा विचार्यताम्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, "यदुवंश और कुरुवंश को सुशोभित करने वाले वीरों! ऐसा प्रतीत होता है कि तुम मुझसे कुछ कहना चाहते हो। जो कुछ कहना चाहते हो कहो; मैं शीघ्र ही तुम्हारी सब इच्छाएँ पूरी करूँगा। तुम मन में अन्यथा विचार न करो॥40॥
 
Yudhishthira said, "Heroes who have adorned the Yadu clan and the Kuru clan! It seems that you want to say something to me. Say whatever you want to say; I will fulfill all your wishes soon. Do not think otherwise in your mind. ॥ 40॥
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