श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 52: श्रीकृष्णका अर्जुनके साथ हस्तिनापुर जाना और वहाँ सबसे मिलकर युधिष्ठिरकी आज्ञा ले सुभद्राके साथ द्वारकाको प्रस्थान करना  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  14.52.16-17h 
त्वयि सर्वं समासक्तं त्वमेवैको जनेश्वर:।
यच्चानुग्रहसंयुक्तमेतदुक्तं त्वयानघ॥ १६॥
एतत् सर्वमहं सम्यगाचरिष्ये जनार्दन।
 
 
अनुवाद
सम्पूर्ण जगत् आपसे व्याप्त है। आप ही मनुष्यों के स्वामी हैं। हे निष्पाप जनार्दन! आप मुझ पर जो कृपा करेंगे, मैं उसी उपदेश का पालन करूँगा।॥16 1/2॥
 
‘The entire universe is pervaded by you. You alone are the lord of human beings. O sinless Janardan! I will follow the advice given by you kindly on me.॥ 16 1/2॥
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