श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 52: श्रीकृष्णका अर्जुनके साथ हस्तिनापुर जाना और वहाँ सबसे मिलकर युधिष्ठिरकी आज्ञा ले सुभद्राके साथ द्वारकाको प्रस्थान करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  14.52.11 
पृथिवीं चान्तरिक्षं च द्यां चैव मधुसूदन।
हसितं तेऽमला ज्योत्स्ना ऋतवश्चेन्द्रियाणि ते॥ ११॥
 
 
अनुवाद
मधुसूदन! आपने ही पृथ्वी, अंतरिक्ष और आकाश की रचना की है। शुद्ध चाँदनी आपकी हँसी है और ऋतुएँ आपकी इन्द्रियाँ हैं।॥11॥
 
‘Madhusudana! You have created the earth, the space and the sky. The pure moonlight is your laughter and the seasons are your senses.॥ 11॥
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