श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 52: श्रीकृष्णका अर्जुनके साथ हस्तिनापुर जाना और वहाँ सबसे मिलकर युधिष्ठिरकी आज्ञा ले सुभद्राके साथ द्वारकाको प्रस्थान करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  14.52.10 
त्वयि सर्वमिदं विश्वं यदिदं स्थाणु जङ्गमम्।
त्वं हि सर्वं विकुरुषे भूतग्रामं चतुर्विधम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
यह चर-अचर जगत् आपमें ही स्थित है। आप ही चारों प्रकार के जीवों की सृष्टि करने वाले हैं॥10॥
 
‘This world of moving and immovable things is all established in you. You are the one who creates all the four types of living beings.॥ 10॥
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