श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 52: श्रीकृष्णका अर्जुनके साथ हस्तिनापुर जाना और वहाँ सबसे मिलकर युधिष्ठिरकी आज्ञा ले सुभद्राके साथ द्वारकाको प्रस्थान करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  14.52.1 
वैशम्पायन उवाच
ततोऽभ्यनोदयत् कृष्णो युज्यतामिति दारुकम्।
मुहूर्तादिव चाचष्ट युक्तमित्येव दारुक:॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - राजन ! तत्पश्चात् भगवान श्रीकृष्ण ने दारुक को आदेश दिया कि 'हल चलाकर रथ तैयार करो।' दो घड़ी के भीतर ही दारुक ने लौटकर बताया कि 'रथ तैयार है।'॥1॥
 
Vaishampayanji says – King! Thereafter, Lord Shri Krishna ordered Daruk to 'prepare the chariot by ploughing'. Within two hours Daruk returned and informed that 'the chariot is ready'. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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