Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.50.52-54h: षडज, ऋषभ, गान्धार, मध्यम, पंचम, निषद, धैवत, इष्ट (प्रिय), अनिष्ट (अप्रिय) और संहत (श्लिष्ट) - इस प्रकार दस प्रकार के आकाशजन्य शब्दों का विभाजन किया गया है। | mahabharat अध्याय 14.50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्य शब्दस्य वक्ष्यामि विस्तरेण बहून् गुणान्॥ ५२॥
षडजर्षभ: स गान्धारो मध्यम: पञ्चमस्तथा।
अत: परं तु विज्ञेयो निषादो धैवतस्तथा।
इष्टश्चानिष्टशब्दश्च संहत: प्रविभागवान्॥ ५३॥
एवं दशविधो ज्ञेय: शब्द आकाशसम्भव:।
अनुवाद
षडज, ऋषभ, गान्धार, मध्यम, पंचम, निषद, धैवत, इष्ट (प्रिय), अनिष्ट (अप्रिय) और संहत (श्लिष्ट) - इस प्रकार दस प्रकार के आकाशजन्य शब्दों का विभाजन किया गया है।
Shadja, Rishabh, Gandhar, Madhyam, Pancham, Nishad, Dhaivat, Ishta (dear), Anishta (unpleasant) and Sanhat (shlisht) - there are ten types of sky-born words divided in this way.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥