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mahabharat 14.50.5: जो लोग सावधानी से शुभ कर्म करते हैं, वे इस संसार में बार-बार जन्म लेते हैं और सुखी होते हैं ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 14.50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान‍्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान‍्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  14.50.5 
आशीर्युक्तानि कर्माणि कुर्वते ये त्वतन्द्रिता:।
तेऽस्मिँल्लोके प्रमोदन्ते जायमाना: पुन: पुन:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
जो लोग सावधानी से शुभ कर्म करते हैं, वे इस संसार में बार-बार जन्म लेते हैं और सुखी होते हैं ॥5॥
 
Those who carefully perform auspicious acts, are born again and again in this world and become happy. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)