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mahabharat 14.50.49-51: रूखा, ठंडा, गरम, मीठा, चमकीला, कठोर, चिकना, शल्कण (हल्का), पतला, कठोर और कोमल - इन बारह प्रकार के स्पर्शों द्वारा वायु के गुणों का विस्तार तत्त्वज्ञ, धार्मिक और सिद्ध ब्राह्मणों ने विधिपूर्वक बताया है ॥49-51॥   |   mahabharat अध्याय 14.50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान‍्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान‍्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन  »  श्लोक 49-51
 
 
श्लोक  14.50.49-51 
रूक्ष: शीतस्तथैवोष्ण: स्निग्धो विशद एव च ॥ ४९॥
कठिनश्चिक्कण: श्लक्ष्ण: पिच्छिलो दारुणो मृदु:।
एवं द्वादशविस्तारो वायव्यो गुण उच्यते॥ ५०॥
विधिवद् ब्राह्मणै: सिद्धैर्धर्मज्ञैस्तत्त्वदर्शिभि:॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
रूखा, ठंडा, गरम, मीठा, चमकीला, कठोर, चिकना, शल्कण (हल्का), पतला, कठोर और कोमल - इन बारह प्रकार के स्पर्शों द्वारा वायु के गुणों का विस्तार तत्त्वज्ञ, धार्मिक और सिद्ध ब्राह्मणों ने विधिपूर्वक बताया है ॥49-51॥
 
Dry, cold, hot, sweet, bright, hard, smooth, slakshna (light), thin, hard and soft - the expansion of the properties of air through these twelve types of touch has been duly explained by the philosophic, religious and siddha Brahmins. 49-51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)