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mahabharat 14.50.48-49h: शब्द और स्पर्श—ये वायु के जानने योग्य दो गुण हैं। इनमें स्पर्श वायु का प्रधान गुण है। स्पर्श भी अनेक प्रकार का माना गया है ॥48 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 14.50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान‍्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान‍्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन  »  श्लोक 48-49h
 
 
श्लोक  14.50.48-49h 
शब्दस्पर्शौ च विज्ञेयौ द्विगुणो वायुरुच्यते॥ ४८॥
वायोश्चापि गुण: स्पर्श: स्पर्शश्च बहुधा स्मृत:।
 
 
अनुवाद
शब्द और स्पर्श—ये वायु के जानने योग्य दो गुण हैं। इनमें स्पर्श वायु का प्रधान गुण है। स्पर्श भी अनेक प्रकार का माना गया है ॥48 1/2॥
 
Sound and touch—these are the two qualities of air which are worth knowing. Among these, touch is the main quality of air. Touch is also considered to be of many types. ॥ 48 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)