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mahabharat 14.50.45-46h: शब्द, स्पर्श और रूप—ये तेजस के तीन गुण कहे गए हैं। इनमें से रूप तेजस का प्रधान गुण है। रूप के भी अनेक प्रकार माने गए हैं ॥45 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 14.50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान‍्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान‍्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन  »  श्लोक 45-46h
 
 
श्लोक  14.50.45-46h 
शब्द: स्पर्शस्तथा रूपं त्रिगुणं ज्योतिरुच्यते॥ ४५॥
ज्योतिषश्च गुणो रूपं रूपं च बहुधा स्मृतम्।
 
 
अनुवाद
शब्द, स्पर्श और रूप—ये तेजस के तीन गुण कहे गए हैं। इनमें से रूप तेजस का प्रधान गुण है। रूप के भी अनेक प्रकार माने गए हैं ॥45 1/2॥
 
Sound, touch and form—these are said to be the three qualities of Tejas. Out of these, form is the main quality of Tejas. Many types of form are also considered. ॥ 45 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)