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mahabharat 14.50.44-45h: जलरूपी रस छह प्रकार का बताया गया है - मधुर, खट्टा, कड़वा, तीखा, कसैला और नमकीन ॥44 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 14.50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान‍्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान‍्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन  »  श्लोक 44-45h
 
 
श्लोक  14.50.44-45h 
मधुरोऽम्ल: कटुस्तिक्त: कषायो लवणस्तथा॥ ४४॥
एवं षड्‍‍विधविस्तारो रसो वारिमय: स्मृत:।
 
 
अनुवाद
जलरूपी रस छह प्रकार का बताया गया है - मधुर, खट्टा, कड़वा, तीखा, कसैला और नमकीन ॥44 1/2॥
 
The watery juice has been described in six types: sweet, sour, bitter, pungent, astringent and salty. ॥ 44 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)