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mahabharat 14.50.34: पाँच महाभूतों को प्रकट करने वाले गुण अहंकार से उत्पन्न हुए हैं। पाँच महाभूतों के कार्य रूप, स्वाद आदि विषय हैं। वे भिन्न-भिन्न गुणों के नाम से प्रसिद्ध हैं। 34॥   |   mahabharat अध्याय 14.50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान‍्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान‍्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  14.50.34 
अहंकारात् तु सम्भूतो महाभूतकृतो गुण:।
पृथक्त्वेन हि भूतानां विषया वै गुणा: स्मृता:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
पाँच महाभूतों को प्रकट करने वाले गुण अहंकार से उत्पन्न हुए हैं। पाँच महाभूतों के कार्य रूप, स्वाद आदि विषय हैं। वे भिन्न-भिन्न गुणों के नाम से प्रसिद्ध हैं। 34॥
 
The qualities that manifest the five great elements have originated from ego. The functions of the five Mahabhutas are the subjects like form, taste etc. They are famous by the names of different qualities. 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)