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mahabharat 14.50.33: प्रधान का दूसरा नाम अव्यक्त है। अव्यक्त का कार्य महत्तत्त्व है और प्रकृति से उत्पन्न महत्तत्त्व का कार्य अहंकार है ॥33॥   |   mahabharat अध्याय 14.50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान‍्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान‍्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  14.50.33 
तत्र प्रधानमव्यक्तमव्यक्तस्य गुणो महान्।
महत्प्रधानभूतस्य गुणोऽहंकार एव च॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
प्रधान का दूसरा नाम अव्यक्त है। अव्यक्त का कार्य महत्तत्त्व है और प्रकृति से उत्पन्न महत्तत्त्व का कार्य अहंकार है ॥33॥
 
Another name for Pradhan is Avyakt. The work of the unmanifested is Mahatattva and the work of Mahattattva arising from nature is ego. 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)