Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.50.30-31: जैसे नाव पर चढ़कर स्थल पर यात्रा करना संभव नहीं है और रथ पर चढ़कर जल में यात्रा करना संभव नहीं है, वैसे ही मनुष्य के द्वारा किए गए विभिन्न कर्म उसे भिन्न-भिन्न स्थानों पर ले जाते हैं। इस संसार में जो जैसा कर्म करता है, उसे वैसा ही फल मिलता है॥30-31॥ | mahabharat अध्याय 14.50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे नाव पर चढ़कर स्थल पर यात्रा करना संभव नहीं है और रथ पर चढ़कर जल में यात्रा करना संभव नहीं है, वैसे ही मनुष्य के द्वारा किए गए विभिन्न कर्म उसे भिन्न-भिन्न स्थानों पर ले जाते हैं। इस संसार में जो जैसा कर्म करता है, उसे वैसा ही फल मिलता है॥30-31॥
Just as it is not possible to travel on land by boarding a boat and it is not possible to travel in water by boarding a chariot, similarly different deeds performed by one will take one to different places. Whatever deeds one has done in this world, he gets the same result.॥30-31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥