Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.50.26: जैसे मनुष्य मोहवश बिना नाव के भयंकर समुद्र में प्रवेश करता है और यह मानता है कि मैं अपनी दोनों भुजाओं से तैरकर उसे पार कर लूँगा, वह निश्चय ही मृत्यु को बुलाता है (उसी प्रकार ज्ञानरूपी नाव का आश्रय लिए बिना मनुष्य इस भवसागर को पार नहीं कर सकता)।॥26॥ | mahabharat अध्याय 14.50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे मनुष्य मोहवश बिना नाव के भयंकर समुद्र में प्रवेश करता है और यह मानता है कि मैं अपनी दोनों भुजाओं से तैरकर उसे पार कर लूँगा, वह निश्चय ही मृत्यु को बुलाता है (उसी प्रकार ज्ञानरूपी नाव का आश्रय लिए बिना मनुष्य इस भवसागर को पार नहीं कर सकता)।॥26॥
Just as a man, out of delusion, enters a dangerous ocean without a boat and believes that he will cross it by swimming with his two arms, he is certainly inviting death (in the same way, without taking the help of the boat of knowledge, a man cannot cross this ocean of existence).॥26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥