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mahabharat 14.50.25: इसी प्रकार बुद्धिमान और गुणवान व्यक्ति, जो योग के सिद्धांतों और विधियों को जानता है, उन्हें अच्छी तरह समझकर आगे बढ़ता है ॥25॥   |   mahabharat अध्याय 14.50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान‍्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान‍्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  14.50.25 
एवं गच्छति मेधावी तत्त्वयोगविधानवित्।
परिज्ञाय गुणज्ञश्च उत्तरादुत्तरोत्तरम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार बुद्धिमान और गुणवान व्यक्ति, जो योग के सिद्धांतों और विधियों को जानता है, उन्हें अच्छी तरह समझकर आगे बढ़ता है ॥25॥
 
Similarly, an intelligent and virtuous person, who knows the principles and methods of yoga, moves forward by understanding them well. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)