Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.50.22-23h: परंतु जैसे घोड़ों से जुते हुए तेज रथ पर बैठकर उसी मार्ग पर चलने वाला मनुष्य शीघ्र ही अपने गंतव्य पर पहुँच जाता है और ऊँचे पर्वत पर चढ़ने के बाद पृथ्वी की ओर नहीं देखता, वैसे ही बुद्धिमान पुरुष उन्नति करते हैं ॥22 1/2॥ | mahabharat अध्याय 14.50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तमेव च यथाध्वानं रथेनेहाशुगामिना।
गच्छत्यश्वप्रयुक्तेन तथा बुद्धिमतां गति:॥ २२॥
ऊर्ध्वं पर्वतमारुह्य नान्ववेक्षेत भूतलम्।
अनुवाद
परंतु जैसे घोड़ों से जुते हुए तेज रथ पर बैठकर उसी मार्ग पर चलने वाला मनुष्य शीघ्र ही अपने गंतव्य पर पहुँच जाता है और ऊँचे पर्वत पर चढ़ने के बाद पृथ्वी की ओर नहीं देखता, वैसे ही बुद्धिमान पुरुष उन्नति करते हैं ॥22 1/2॥
But just as a man travelling on the same route in a fast chariot drawn by horses reaches his destination very quickly and does not look down at the earth after climbing a high mountain, similarly the wise men progress. ॥22 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥