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mahabharat 14.50.2-3h: इस विषय को पूरा सुनो और इसे अच्छी तरह आत्मसात करो। ऐसा माना जाता है कि सभी प्राणियों के प्रति अहिंसा ही सर्वश्रेष्ठ कर्तव्य है। यह साधन चिंता से मुक्त, सर्वोत्तम और धर्म को लक्ष्य करने वाला है॥ 2 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 14.50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान‍्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान‍्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन  »  श्लोक 2-3h
 
 
श्लोक  14.50.2-3h 
समस्तमिह तच् छ ्र ुत्वा सम्यगेवावधार्यताम्।
अहिंसा सर्वभूतानामेतत् कृत्यतमं मतम्॥ २॥
एतत् पदमनुद्विग्नं वरिष्ठं धर्मलक्षणम्।
 
 
अनुवाद
इस विषय को पूरा सुनो और इसे अच्छी तरह आत्मसात करो। ऐसा माना जाता है कि सभी प्राणियों के प्रति अहिंसा ही सर्वश्रेष्ठ कर्तव्य है। यह साधन चिंता से मुक्त, सर्वोत्तम और धर्म को लक्ष्य करने वाला है॥ 2 1/2॥
 
Listen to this topic completely and imbibe it well. It is believed that non-violence towards all creatures is the best duty. This means is free from anxiety, the best and aims at Dharma.॥ 2 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)