Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.50.19: उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति यात्रा-व्यय की व्यवस्था किए बिना यात्रा करता है, तो उसे मार्ग में बहुत कष्ट उठाना पड़ता है, अथवा बीच रास्ते में ही उसकी मृत्यु भी हो सकती है ॥19॥   |   mahabharat अध्याय 14.50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान‍्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान‍्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  14.50.19 
यथाध्वानमपाथेय: प्रपन्नो मनुज: क्वचित्।
क्लेशेन याति महता विनश्येदन्तरापि च॥ १९॥
 
 
अनुवाद
उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति यात्रा-व्यय की व्यवस्था किए बिना यात्रा करता है, तो उसे मार्ग में बहुत कष्ट उठाना पड़ता है, अथवा बीच रास्ते में ही उसकी मृत्यु भी हो सकती है ॥19॥
 
For example, if a person undertakes a journey without making arrangements for his travel expenses, he has to suffer a lot on the way, or he may even die midway.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)