Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.50.18: ऐसा विचार करके मनुष्य को किसी प्रकार धर्म के साधनों का ज्ञान प्राप्त कर लेना चाहिए; क्योंकि साधन को जानने वाला चतुर पुरुष महान सुख प्राप्त करता है ॥18॥ | mahabharat अध्याय 14.50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं धर्मस्य विज्ञेयं संसाधनमुपायत:।
उपायज्ञो हि मेधावी सुखमत्यन्तमश्नुते॥ १८॥
अनुवाद
ऐसा विचार करके मनुष्य को किसी प्रकार धर्म के साधनों का ज्ञान प्राप्त कर लेना चाहिए; क्योंकि साधन को जानने वाला चतुर पुरुष महान सुख प्राप्त करता है ॥18॥
Having thought thus, one should by some means acquire knowledge of the means of Dharma; for the clever man who knows the means attains great happiness. ॥18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥