Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.50.17: जिसकी बुद्धि अच्छी नहीं है, वह हजार बार प्रयत्न करने पर भी ज्ञान प्राप्त नहीं कर पाता, जबकि बुद्धिमान पुरुष चौथाई प्रयत्न से ही ज्ञान प्राप्त कर लेता है और सुख का अनुभव करता है ॥17॥ | mahabharat अध्याय 14.50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सहस्रेणापि दुर्मेधा न बुद्धिमधिगच्छति।
चतुर्थेनाप्यथांशेन बुद्धिमान् सुखमेधते॥ १७॥
अनुवाद
जिसकी बुद्धि अच्छी नहीं है, वह हजार बार प्रयत्न करने पर भी ज्ञान प्राप्त नहीं कर पाता, जबकि बुद्धिमान पुरुष चौथाई प्रयत्न से ही ज्ञान प्राप्त कर लेता है और सुख का अनुभव करता है ॥17॥
One whose intellect is not good, does not acquire knowledge even after trying a thousand times, whereas a wise man gains knowledge with just a quarter of the effort and experiences happiness. ॥17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥