Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.50.16: इस प्रकार सत्त्वगुण व्यक्त है और पुरुष अव्यक्त माना गया है। हे ब्रह्मर्षियों! इस तत्त्व को समझो। अब मैं तुम्हें आगे की बातें बताता हूँ॥16॥   |   mahabharat अध्याय 14.50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान‍्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान‍्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  14.50.16 
व्यक्त: सत्त्वगुणस्त्वेवं पुरुषोऽव्यक्त इष्यते।
एतद् विप्रा विजानीत हन्त भूयो ब्रवीमि व:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार सत्त्वगुण व्यक्त है और पुरुष अव्यक्त माना गया है। हे ब्रह्मर्षियों! इस तत्त्व को समझो। अब मैं तुम्हें आगे की बातें बताता हूँ॥16॥
 
In this way, Sattva Guna is expressed and Purusha is considered unexpressed. O Brahmarishis! Understand this principle. Now I will tell you further things.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)