Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.50.12-13h: जैसे कमल के पत्ते पर पड़ी हुई जल की चंचल बूँद भी उसे गीला नहीं कर सकती, वैसे ही विद्वान् पुरुष भी समस्त गुणों से संबंधित होते हुए भी उनमें से किसी में भी आसक्त नहीं होता। अतः क्षेत्रज्ञ पुरुष ही वास्तव में विरक्त है, इसमें संशय नहीं है। ॥12 1/2॥ | mahabharat अध्याय 14.50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे कमल के पत्ते पर पड़ी हुई जल की चंचल बूँद भी उसे गीला नहीं कर सकती, वैसे ही विद्वान् पुरुष भी समस्त गुणों से संबंधित होते हुए भी उनमें से किसी में भी आसक्त नहीं होता। अतः क्षेत्रज्ञ पुरुष ही वास्तव में विरक्त है, इसमें संशय नहीं है। ॥12 1/2॥
Just as a restless drop of water falling on a lotus leaf cannot wet it, similarly a learned person, despite being related to all the qualities, is not attached to any of them. Therefore, the person who knows the field is actually detached, there is no doubt about it. ॥12 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥