Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.50.11: वह विद्वान सर्वत्र स्थित ज्ञान का समभाव से पालन करता है। जैसे कमल का पत्ता अनासक्त रहते हुए भी जल को धारण करता है, वैसे ही ज्ञानी पुरुष सदैव सत्त्व का सेवन करता है। 11॥ | mahabharat अध्याय 14.50: सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान्की प्रशंसा, पञ्चभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
समं संज्ञानुगश्चैव स सर्वत्र व्यवस्थित:।
उपभुङ्क्ते सदा सत्त्वमप: पुष्करपर्णवत्॥ ११॥
अनुवाद
वह विद्वान सर्वत्र स्थित ज्ञान का समभाव से पालन करता है। जैसे कमल का पत्ता अनासक्त रहते हुए भी जल को धारण करता है, वैसे ही ज्ञानी पुरुष सदैव सत्त्व का सेवन करता है। 11॥
That expert follows the knowledge well established everywhere with equanimity. Just as a lotus leaf retains water while remaining unattached, similarly a knowledgeable person always consumes Sattva. 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥