श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 49: धर्मका निर्णय जाननेके लिये ऋषियोंका प्रश्न  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  14.49.3 
अनित्यं नित्यमित्येके नास्त्यस्तीत्यपि चापरे।
एकरूपं द्विधेत्येके व्यामिश्रमिति चापरे॥ ३॥
 
 
अनुवाद
कुछ लोग कहते हैं कि धर्म अनित्य है और कुछ लोग कहते हैं कि धर्म नित्य है। कुछ लोग कहते हैं कि धर्म नाम की कोई वस्तु है ही नहीं। कुछ लोग कहते हैं कि धर्म अवश्य है। कुछ लोग कहते हैं कि एक ही धर्म दो प्रकार का होता है और कुछ लोग कहते हैं कि धर्म मिश्रित है।॥3॥
 
Some say that Dharma is temporary and some say it is permanent. Others say that there is no such thing as Dharma. Some say that it definitely exists. Some say that the same Dharma is of two types and some people say that Dharma is mixed.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)