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mahabharat 14.47.9: जो सम्पूर्ण प्राणियों के परमात्म स्वरूप को, उनके गुणों और तत्त्व को भली-भाँति समझकर तथा आसक्ति और अहंकार से मुक्त हो गया है, उसे इसमें कोई संदेह नहीं कि वह मुक्त हो जाएगा ॥9॥   |   mahabharat अध्याय 14.47: मुक्तिके साधनोंका, देहरूपी वृक्षका तथा ज्ञान-खड्गसे उसे काटनेका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 47: मुक्तिके साधनोंका, देहरूपी वृक्षका तथा ज्ञान-खड्गसे उसे काटनेका वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  14.47.9 
प्रधानगुणतत्त्वज्ञ: सर्वभूतप्रधानवित्।
निर्ममो निरहंकारो मुच्यते नात्र संशय:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जो सम्पूर्ण प्राणियों के परमात्म स्वरूप को, उनके गुणों और तत्त्व को भली-भाँति समझकर तथा आसक्ति और अहंकार से मुक्त हो गया है, उसे इसमें कोई संदेह नहीं कि वह मुक्त हो जाएगा ॥9॥
 
He who, having thoroughly understood the supreme nature of all beings and its qualities and essence and having become free from attachment and ego, has no doubt that he will be liberated. ॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)