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mahabharat 14.47.3-4: जिनके मन मलों से शुद्ध हो गए हैं, जो परम शुद्ध हैं, जिन्होंने रजोगुण का त्याग कर दिया है, जिनका अन्तःकरण निर्मल है, जो त्याग में तत्पर हैं और जो परमात्मा को जानते हैं, वे ही तपस्या द्वारा शुभ मार्ग अपनाकर परमेश्वर को प्राप्त होते हैं ॥3-4॥   |   mahabharat अध्याय 14.47: मुक्तिके साधनोंका, देहरूपी वृक्षका तथा ज्ञान-खड्गसे उसे काटनेका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 47: मुक्तिके साधनोंका, देहरूपी वृक्षका तथा ज्ञान-खड्गसे उसे काटनेका वर्णन  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  14.47.3-4 
निर्णिक्तमनस: पूता व्युत्क्रान्तरजसोऽमला:॥ ३॥
तपसा क्षेममध्वानं गच्छन्ति परमेश्वरम्।
संन्यासनिरता नित्यं ये च ब्रह्मविदो जना:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
जिनके मन मलों से शुद्ध हो गए हैं, जो परम शुद्ध हैं, जिन्होंने रजोगुण का त्याग कर दिया है, जिनका अन्तःकरण निर्मल है, जो त्याग में तत्पर हैं और जो परमात्मा को जानते हैं, वे ही तपस्या द्वारा शुभ मार्ग अपनाकर परमेश्वर को प्राप्त होते हैं ॥3-4॥
 
Those whose minds have been cleansed of impurities, who are supremely pure, who have renounced the mode of passion, whose conscience is clean, who are devoted to renunciation and know the Supreme Being, by adopting the auspicious path through austerity they attain the Supreme Lord. ॥ 3-4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)