Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.47.2-3h: वह ब्रह्म, जो वैदिक ज्ञान का आधार है, (अज्ञानियों के लिए) बहुत दूर है। वह निर्द्वन्द्व, निर्गुण, सनातन, अचिन्त्य और गुणों से युक्त है। दृढ़ पुरुष ज्ञान और तप के द्वारा ईश्वर को प्राप्त करते हैं। 2 1/2॥ | mahabharat अध्याय 14.47: मुक्तिके साधनोंका, देहरूपी वृक्षका तथा ज्ञान-खड्गसे उसे काटनेका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह ब्रह्म, जो वैदिक ज्ञान का आधार है, (अज्ञानियों के लिए) बहुत दूर है। वह निर्द्वन्द्व, निर्गुण, सनातन, अचिन्त्य और गुणों से युक्त है। दृढ़ पुरुष ज्ञान और तप के द्वारा ईश्वर को प्राप्त करते हैं। 2 1/2॥
That Brahma, the basis of Vedic knowledge, is very far away (for the ignorant). He is without conflict, without qualities, eternal, unthinkable and full of qualities. Persistent men realize God through knowledge and penance. 2 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥