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न शिल्पजीविकां जीवेद्धिरण्यं नोत कामयेत्।
न द्वेष्टा नोपदेष्टा च भवेच्च निरुपस्कृत:॥ ३७॥
अनुवाद
वह शिल्पकला करके जीविका न चलाए, सोने की इच्छा न करे, किसी से द्वेष न करे, उपदेशक न बने और संचय से रहित रहे। 37.
He should not earn his livelihood by doing craftsmanship, should not desire gold, should not hate anyone, should not become a preacher and should remain devoid of hoardings. 37.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥