मृदमापस्तथान्नानि पत्रपुष्पफलानि च।
असंवृतानि गृह्णीयात् प्रवृत्तानि च कार्यवान्॥ ३६॥
अनुवाद
मिट्टी, जल, अन्न, पत्ते, फूल और फल - यदि ये वस्तुएँ किसी के पास न हों, तो कोई सक्रिय संन्यासी आवश्यकता पड़ने पर इनका उपयोग कर सकता है ॥ 36॥
Soil, water, food, leaves, flowers and fruits - if these things are not in someone's possession, then an active Sanyasi can put them to use if required. ॥ 36॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥