Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.46.28-29h: मोक्ष-धर्म के ज्ञाता संन्यासी को सदैव शुद्ध जल का प्रयोग करना उचित है। उसे प्रतिदिन ताजे निकाले हुए जल से स्नान करना चाहिए (बहुत पहले से एकत्रित जल से नहीं)।॥28 1/2॥ | mahabharat अध्याय 14.46: ब्रह्मचारी, वानप्रस्थी और संन्यासीके धर्मका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मोक्ष-धर्म के ज्ञाता संन्यासी को सदैव शुद्ध जल का प्रयोग करना उचित है। उसे प्रतिदिन ताजे निकाले हुए जल से स्नान करना चाहिए (बहुत पहले से एकत्रित जल से नहीं)।॥28 1/2॥
It is appropriate for a Sanyasi who has knowledge of Moksha-dharma to always use pure water. He should bathe daily with freshly drawn water (not with water collected long ago).॥28 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥