Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.46.16: शरीर को सदैव पवित्र रखो। धर्मपालन में निपुणता प्राप्त करो। वन में रहते हुए भी मन को एकाग्र करो। इस प्रकार उत्तम धर्मों का पालन करने वाला जितेन्द्रिय वानप्रस्थी स्वर्ग में विजय प्राप्त करता है। 16॥ | mahabharat अध्याय 14.46: ब्रह्मचारी, वानप्रस्थी और संन्यासीके धर्मका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शुचिदेह: सदा दक्षो वननित्य: समाहित:।
एवं युक्तो जयेत् स्वर्गं वानप्रस्थो जितेन्द्रिय:॥ १६॥
अनुवाद
शरीर को सदैव पवित्र रखो। धर्मपालन में निपुणता प्राप्त करो। वन में रहते हुए भी मन को एकाग्र करो। इस प्रकार उत्तम धर्मों का पालन करने वाला जितेन्द्रिय वानप्रस्थी स्वर्ग में विजय प्राप्त करता है। 16॥
Always keep the body pure. Gain proficiency in following religion. Always stay in the forest and concentrate your mind. In this way, the Jitendriya Vanaprasthi who follows the best religions attains victory in heaven. 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥