Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.46.10: उसे मृगचर्म या छाल के वस्त्र धारण करने चाहिए। उसे प्रातः और सायं स्नान करना चाहिए। उसे सदैव वन में रहना चाहिए। उसे फिर कभी गाँव में प्रवेश नहीं करना चाहिए।॥10॥ | mahabharat अध्याय 14.46: ब्रह्मचारी, वानप्रस्थी और संन्यासीके धर्मका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
चर्मवल्कलसंवासी सायं प्रातरुपस्पृशेत्।
अरण्यगोचरो नित्यं न ग्रामं प्रविशेत् पुन:॥ १०॥
अनुवाद
उसे मृगचर्म या छाल के वस्त्र धारण करने चाहिए। उसे प्रातः और सायं स्नान करना चाहिए। उसे सदैव वन में रहना चाहिए। उसे फिर कभी गाँव में प्रवेश नहीं करना चाहिए।॥10॥
He should wear deerskin or bark clothes. He should bathe in the morning and evening. He should always stay in the forest. He should never enter the village again.॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥