श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 43: चराचर प्राणियोंके अधिपतियोंका, धर्म आदिके लक्षणोंका और विषयोंकी अनुभूतिके साधनोंका वर्णन तथा क्षेत्रज्ञकी विलक्षणता  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  14.43.7 
यम: पितृॄृणामधिप: सरितामथ सागर:।
अम्भसां वरुणो राजा मरुतामिन्द्र उच्यते॥ ७॥
 
 
अनुवाद
यमराज पितरों, समुद्रों और नदियों के स्वामी हैं। वरुण को जल का और इंद्र को मरुतों का स्वामी कहा गया है।
 
Yamraj is the lord of the ancestors and the oceans and rivers. Varuna is said to be the lord of water and Indra is said to be the lord of the Maruts. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)