Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.43.37: जो अव्यक्त प्रकृति गुणों की उत्पत्ति और प्रलय का कारण है, उसे क्षेत्र कहते हैं। मैं उसमें आसक्त होकर उसे सदैव जानता और सुनता हूँ ॥37॥ | mahabharat अध्याय 14.43: चराचर प्राणियोंके अधिपतियोंका, धर्म आदिके लक्षणोंका और विषयोंकी अनुभूतिके साधनोंका वर्णन तथा क्षेत्रज्ञकी विलक्षणता । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो अव्यक्त प्रकृति गुणों की उत्पत्ति और प्रलय का कारण है, उसे क्षेत्र कहते हैं। मैं उसमें आसक्त होकर उसे सदैव जानता और सुनता हूँ ॥37॥
The unmanifested nature which is the cause of the origin and dissolution of the Gunas is called the field. I, being attached to it, always know and hear it. ॥ 37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥