Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.43.34: मन का गुण चिंतन है, जो बुद्धि द्वारा ग्रहण किया जाता है और हृदय में स्थित चेतना (आत्मा) मन को उसकी चिंतन प्रक्रिया में सहायता करती है ॥ 34॥ | mahabharat अध्याय 14.43: चराचर प्राणियोंके अधिपतियोंका, धर्म आदिके लक्षणोंका और विषयोंकी अनुभूतिके साधनोंका वर्णन तथा क्षेत्रज्ञकी विलक्षणता । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मनसश्च गुणश्चिन्ता प्रज्ञया स तु गृह्यते।
हृदिस्थश्चेतनो धातुर्मनोज्ञाने विधीयते॥ ३४॥
अनुवाद
मन का गुण चिंतन है, जो बुद्धि द्वारा ग्रहण किया जाता है और हृदय में स्थित चेतना (आत्मा) मन को उसकी चिंतन प्रक्रिया में सहायता करती है ॥ 34॥
The quality of the mind is thinking, which is received by the intellect and the consciousness (soul) situated in the heart helps the mind in its thinking process. ॥ 34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥