Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.43.25-26: मन का लक्षण ध्यान है और महापुरुष का लक्षण बाह्य रूप से व्यक्त नहीं होता (स्वतः अनुभव किया हुआ होता है)। योग का लक्षण प्रवृत्ति है और त्याग का लक्षण ज्ञान है। अतः बुद्धिमान पुरुष को चाहिए कि ज्ञान का आश्रय लेकर यहाँ त्याग को अपना ले॥ 25-26॥ | mahabharat अध्याय 14.43: चराचर प्राणियोंके अधिपतियोंका, धर्म आदिके लक्षणोंका और विषयोंकी अनुभूतिके साधनोंका वर्णन तथा क्षेत्रज्ञकी विलक्षणता । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मन का लक्षण ध्यान है और महापुरुष का लक्षण बाह्य रूप से व्यक्त नहीं होता (स्वतः अनुभव किया हुआ होता है)। योग का लक्षण प्रवृत्ति है और त्याग का लक्षण ज्ञान है। अतः बुद्धिमान पुरुष को चाहिए कि ज्ञान का आश्रय लेकर यहाँ त्याग को अपना ले॥ 25-26॥
The characteristic of the mind is meditation and the characteristic of a great man is not expressed externally (it is self-perceived). The characteristic of yoga is inclination and the characteristic of renunciation is knowledge. Therefore, an intelligent man should take shelter of knowledge and adopt renunciation here.॥ 25-26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥