Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.43.20-21: अब मैं सबके द्वारा बताए गए धर्म के लक्षणों का वर्णन करता हूँ। अहिंसा उत्तम धर्म है और हिंसा अधर्म का लक्षण (स्वरूप) है। प्रकाश देवताओं का लक्षण है और यज्ञ आदि कर्म मनुष्यों के लक्षण हैं। 20-21। | mahabharat अध्याय 14.43: चराचर प्राणियोंके अधिपतियोंका, धर्म आदिके लक्षणोंका और विषयोंकी अनुभूतिके साधनोंका वर्णन तथा क्षेत्रज्ञकी विलक्षणता । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अब मैं सबके द्वारा बताए गए धर्म के लक्षणों का वर्णन करता हूँ। अहिंसा उत्तम धर्म है और हिंसा अधर्म का लक्षण (स्वरूप) है। प्रकाश देवताओं का लक्षण है और यज्ञ आदि कर्म मनुष्यों के लक्षण हैं। 20-21।
Now I describe the characteristics of the religion prescribed by everyone. Non-violence is the best religion and violence is the characteristic (form) of irreligion. Light is the characteristic of gods and rituals like yagya etc. are the characteristics of humans. 20-21.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥