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mahabharat 14.43.18: जिनके राज्य में कुलीन पुरुष दुःखी होते हैं, वे राजा अपने समस्त राजसी गुणों को खो देते हैं और मरने के बाद नीच गति को प्राप्त होते हैं ॥18॥   |   mahabharat अध्याय 14.43: चराचर प्राणियोंके अधिपतियोंका, धर्म आदिके लक्षणोंका और विषयोंकी अनुभूतिके साधनोंका वर्णन तथा क्षेत्रज्ञकी विलक्षणता   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 43: चराचर प्राणियोंके अधिपतियोंका, धर्म आदिके लक्षणोंका और विषयोंकी अनुभूतिके साधनोंका वर्णन तथा क्षेत्रज्ञकी विलक्षणता  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  14.43.18 
राज्ञां हि विषये येषामवसीदन्ति साधव:।
हीनास्ते स्वगुणै: सर्वै: प्रेत्य चोन्मार्गगामिन:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
जिनके राज्य में कुलीन पुरुष दुःखी होते हैं, वे राजा अपने समस्त राजसी गुणों को खो देते हैं और मरने के बाद नीच गति को प्राप्त होते हैं ॥18॥
 
Those kings in whose rule noble men are troubled, they lose all their royal virtues and after death attain a low state. ॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)