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mahabharat 14.43.12: मैं समस्त प्राणियों का महान् स्वामी हूँ और ब्रह्ममय हूँ। मुझसे या विष्णु से बड़ा कोई नहीं है॥12॥   |   mahabharat अध्याय 14.43: चराचर प्राणियोंके अधिपतियोंका, धर्म आदिके लक्षणोंका और विषयोंकी अनुभूतिके साधनोंका वर्णन तथा क्षेत्रज्ञकी विलक्षणता   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 43: चराचर प्राणियोंके अधिपतियोंका, धर्म आदिके लक्षणोंका और विषयोंकी अनुभूतिके साधनोंका वर्णन तथा क्षेत्रज्ञकी विलक्षणता  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  14.43.12 
सर्वेषामेव भूतानामहं ब्रह्ममयो महान्।
भूतं परतरं मत्तो विष्णोर्वापि न विद्यते॥ १२॥
 
 
अनुवाद
मैं समस्त प्राणियों का महान् स्वामी हूँ और ब्रह्ममय हूँ। मुझसे या विष्णु से बड़ा कोई नहीं है॥12॥
 
I am the great lord of all beings and am the Brahmamay. There is no being greater than me or Vishnu.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)