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mahabharat 14.42.8-9: प्राण, अपान, उदान, समान और व्यान - ये पाँच वायु शरीर में स्थिर रूप से निवास करती हैं; अतः ये सूक्ष्म हैं। मन, वाणी और बुद्धि के साथ इनकी गणना करने पर इनकी संख्या आठ हो जाती है। ये आठ इस जगत के उपादान कारण हैं। 8-9   |   mahabharat अध्याय 14.42: अहंकारसे पञ्च महाभूतों और इन्द्रियोंकी सृष्टि, अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा निवृत्तिमार्गका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.42.8-9 
प्राणापानावुदानश्च समानो व्यान एव च॥ ८॥
अन्तरात्मनि चाप्येते नियता: पञ्च वायव:।
वाङ्मनोबुद्धिभि: सार्द्धमिदमष्टात्मकं जगत‍्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
प्राण, अपान, उदान, समान और व्यान - ये पाँच वायु शरीर में स्थिर रूप से निवास करती हैं; अतः ये सूक्ष्म हैं। मन, वाणी और बुद्धि के साथ इनकी गणना करने पर इनकी संख्या आठ हो जाती है। ये आठ इस जगत के उपादान कारण हैं। 8-9
 
Prana, Apana, Udana, Samana and Vyana - these five airs reside in the body in a fixed manner; hence they are subtle. When counted along with mind, speech and intellect, their number becomes eight. These eight are the material causes of this world. 8-9.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)