Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.42.59-60h: जो मनुष्य अपने मन को हृदय में स्थित करके अपने भीतर ध्यान द्वारा आत्मा को देखने का प्रयत्न करता है, वह सम्पूर्ण प्राणियों में सर्वज्ञ हो जाता है और अपने अन्तःकरण में परम तत्त्व का अनुभव करता है ॥59 1/2॥ | mahabharat अध्याय 14.42: अहंकारसे पञ्च महाभूतों और इन्द्रियोंकी सृष्टि, अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा निवृत्तिमार्गका उपदेश । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो मनुष्य अपने मन को हृदय में स्थित करके अपने भीतर ध्यान द्वारा आत्मा को देखने का प्रयत्न करता है, वह सम्पूर्ण प्राणियों में सर्वज्ञ हो जाता है और अपने अन्तःकरण में परम तत्त्व का अनुभव करता है ॥59 1/2॥
He who, having established his mind in the heart, tries to see the Self through meditation within himself, becomes omniscient of all beings and experiences the Supreme Element in his inner being. ॥ 59 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥