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mahabharat 14.42.57: जिसने इस संसार में तीन गुणों वाले पाँच भौतिक शरीरों का अभिमान त्याग दिया है, वह अपने हृदयाकाश में परब्रह्म रूप परमपद को प्राप्त होता है - वह मोक्ष को प्राप्त होता है ॥57॥   |   mahabharat अध्याय 14.42: अहंकारसे पञ्च महाभूतों और इन्द्रियोंकी सृष्टि, अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा निवृत्तिमार्गका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.42.57 
यस्यैते निर्जिता लोके त्रिगुणा: पञ्चधातव:।
व्योम्नि तस्य परं स्थानमानन्त्यमथ लभ्यते॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
जिसने इस संसार में तीन गुणों वाले पाँच भौतिक शरीरों का अभिमान त्याग दिया है, वह अपने हृदयाकाश में परब्रह्म रूप परमपद को प्राप्त होता है - वह मोक्ष को प्राप्त होता है ॥57॥
 
One who has given up the pride of the five material bodies with three qualities in this world, he attains the supreme medallion in the form of Parabrahma in the space of his heart - he attains salvation. 57॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)