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mahabharat 14.42.40-41h: हे ब्राह्मणो! जो मनुष्य इस विषय को विधिपूर्वक जानता है, वह योगी हो जाता है और सभी पापों से मुक्त हो जाता है। इसे अच्छी तरह समझ लो।   |   mahabharat अध्याय 14.42: अहंकारसे पञ्च महाभूतों और इन्द्रियोंकी सृष्टि, अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा निवृत्तिमार्गका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 42: अहंकारसे पञ्च महाभूतों और इन्द्रियोंकी सृष्टि, अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा निवृत्तिमार्गका उपदेश  »  श्लोक 40-41h
 
 
श्लोक  14.42.40-41h 
एतद् यो वेत्ति विधिवद् युक्त: स स्याद् द्विजर्षभा:॥ ४०॥
विमुक्त: सर्वपापेभ्य इति चैव निबोधत।
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मणो! जो मनुष्य इस विषय को विधिपूर्वक जानता है, वह योगी हो जाता है और सभी पापों से मुक्त हो जाता है। इसे अच्छी तरह समझ लो।
 
O Brahmins! The person who knows this subject methodically, becomes a Yogi and gets rid of all sins. Understand this well. 40 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)