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mahabharat 14.42.35-36h: जूँ और अन्य कीड़े-मकोड़े तथा जीव-जंतु जो पसीने से उत्पन्न होते हैं, उन्हें स्वेदज कहते हैं। यह दूसरा जन्म पहले जन्म से निम्न स्तर का कहा गया है।   |   mahabharat अध्याय 14.42: अहंकारसे पञ्च महाभूतों और इन्द्रियोंकी सृष्टि, अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा निवृत्तिमार्गका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 42: अहंकारसे पञ्च महाभूतों और इन्द्रियोंकी सृष्टि, अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा निवृत्तिमार्गका उपदेश  »  श्लोक 35-36h
 
 
श्लोक  14.42.35-36h 
स्वेदजा: कृमय: प्रोक्ता जन्तवश्च यथाक्रमम्॥ ३५॥
जन्म द्वितीयमित्येतज्जघन्यतरमुच्यते।
 
 
अनुवाद
जूँ और अन्य कीड़े-मकोड़े तथा जीव-जंतु जो पसीने से उत्पन्न होते हैं, उन्हें स्वेदज कहते हैं। यह दूसरा जन्म पहले जन्म से निम्न स्तर का कहा गया है।
 
Lice and other insects and animals which are born from sweat are called Swedaj. This second birth is said to be of a lower level than the first. 35 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)