Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.42.32-34h: प्राणियों के रहने के स्थान केवल तीन ही हैं- जल, स्थल और आकाश। चौथा स्थान संभव नहीं है। देहधारियों की चार प्रकार की योनियाँ हैं- अण्डज, वनस्पति, स्वेद और गर्भ। सम्पूर्ण प्राणी समुदाय में केवल यही चार योनियाँ देखी जाती हैं। ॥32-33 1/2॥ | mahabharat अध्याय 14.42: अहंकारसे पञ्च महाभूतों और इन्द्रियोंकी सृष्टि, अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा निवृत्तिमार्गका उपदेश । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्रीणि स्थानानि भूतानां चतुर्थं नोपपद्यते॥ ३२॥
स्थलमापस्तथाऽऽकाशं जन्म चापि चतुर्विधम्।
अण्डजोद्भिज्जसंस्वेदजरायुजमथापि च॥ ३३॥
चतुर्धा जन्म इत्येतद् भूतग्रामस्य लक्ष्यते।
अनुवाद
प्राणियों के रहने के स्थान केवल तीन ही हैं- जल, स्थल और आकाश। चौथा स्थान संभव नहीं है। देहधारियों की चार प्रकार की योनियाँ हैं- अण्डज, वनस्पति, स्वेद और गर्भ। सम्पूर्ण प्राणी समुदाय में केवल यही चार योनियाँ देखी जाती हैं। ॥32-33 1/2॥
There are only three places where living beings live- water, land and sky. The fourth place is not possible. There are four types of births of embodied beings- oviparous, plant-born, sweat-born and womb-born. Only these four types of births are seen in the entire community of beings. ॥32-33 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥