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mahabharat 14.42.3: धीर मुनियो! जब प्रलय का समय आता है, जब महाभूत नष्ट हो जाते हैं, तब सम्पूर्ण प्राणी अत्यंत भयभीत हो जाते हैं॥3॥   |   mahabharat अध्याय 14.42: अहंकारसे पञ्च महाभूतों और इन्द्रियोंकी सृष्टि, अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा निवृत्तिमार्गका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 42: अहंकारसे पञ्च महाभूतों और इन्द्रियोंकी सृष्टि, अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा निवृत्तिमार्गका उपदेश  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  14.42.3 
महाभूतविनाशान्ते प्रलये प्रत्युपस्थिते।
सर्वप्राणभृतां धीरा महदभ्युद्यते भयम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
धीर मुनियो! जब प्रलय का समय आता है, जब महाभूत नष्ट हो जाते हैं, तब सम्पूर्ण प्राणी अत्यंत भयभीत हो जाते हैं॥3॥
 
Patient sages! When the time of Pralaya (cataclysm) comes when the great elements are destroyed, then all creatures get extremely afraid. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)