श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 42: अहंकारसे पञ्च महाभूतों और इन्द्रियोंकी सृष्टि, अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा निवृत्तिमार्गका उपदेश  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  14.42.20-21h 
तृतीयं ज्योतिरित्याहुश्चक्षुरध्यात्ममुच्यते॥ २०॥
अधिभूतं ततो रूपं सूर्यस्तत्राधिदैवतम्।
 
 
अनुवाद
तीसरा तत्व तेजस कहलाता है। नेत्र उसका आध्यात्मिक तत्व है, रूप उसका अधिभूत है और सूर्य उसका अधिदैवत है।
 
The third element is called Tejas. The eye is its spiritual element, form is its Adhibhuta and the sun is its Adhidaivat.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)